संजीदा सी ज़िन्दगी,
कुछ मैले से कपड़े,
फैले पड़े हैं टूटे ख़्वाबों के शीशे.
रहता हूं इन्हीं में लेकर के नाम तेरा।
सांसों का बोझ है ज़िन्दगी के कांधों पर,
बस ज़िंदा हूं मैं..लेकर के नाम तेरा।
जि़स्म की छाल पर वक्त की मार है,
दोज़क सी ज़िन्दगी इस कदर बेहाल है,
रोज़ गिरता..
फिर खड़ा..बस चल दिया...
लेकर के नाम तेरा।
करूं सजदा मैं किसका कोई मुझको बता दे,
हुनर है ये किसका जो लकीरें मिटा दे,
ख़ुदा पत्थरों में है रहता मैंने सुना,
हर पत्थर है चूमा..लेकर के नाम तेरा।
नहीं कोई शिक्वा जो मिल ना सके हम,
है एक नाम तेरा जो ले ना सके हम,
मगर याद तूने किया होगा हमको,
और तड़पेगा तू भी...........
लेकर के नाम मेरा...
कुछ मैले से कपड़े,
फैले पड़े हैं टूटे ख़्वाबों के शीशे.
रहता हूं इन्हीं में लेकर के नाम तेरा।
सांसों का बोझ है ज़िन्दगी के कांधों पर,
बस ज़िंदा हूं मैं..लेकर के नाम तेरा।
जि़स्म की छाल पर वक्त की मार है,
दोज़क सी ज़िन्दगी इस कदर बेहाल है,
रोज़ गिरता..
फिर खड़ा..बस चल दिया...
लेकर के नाम तेरा।
करूं सजदा मैं किसका कोई मुझको बता दे,
हुनर है ये किसका जो लकीरें मिटा दे,
ख़ुदा पत्थरों में है रहता मैंने सुना,
हर पत्थर है चूमा..लेकर के नाम तेरा।
नहीं कोई शिक्वा जो मिल ना सके हम,
है एक नाम तेरा जो ले ना सके हम,
मगर याद तूने किया होगा हमको,
और तड़पेगा तू भी...........
लेकर के नाम मेरा...
