
क्या है आतंकवाद..? कहते हैं जब कुछ मासूम जानें जाती हैं और घर के चूल्हे रोते हैं तब फैलता है..आतंकवाद।कहीं जब धमाकों की खबरें आतीं हैं और गोलियां सन्नाटा चीरती हैं..तब फैलता है आतंकवाद। कभी मज़हब के नाम पर...तो कभी जे़हाद के नाम पर..आतंक की कलम से लिखी जाती है बेगुनाहों की तकदीरें।शायद यही वजह है कि मुंबई में घटी वो खौ़फनाक घटना का मंज़र तो ख़त्म हो गया..लेकिन अपने पीछे छोड़ गया कई अनसुलझे सवाल...कि कौन हैं ये आतंकवादी ?आखिर ये चाहते क्या हैं ?अगर ये मज़हब की बात करते हैं तो इनकी गोलियां किसी का मज़हब पूछकर उन्हे नहीं मारतीं।इनके द्वारा किये गये धमाकों में मुसलमान भी मारे जाते हैं।इसका मतलब तो साफ है कि इनका कोई मज़हब नहीं।अगर इस्लाम की बात की जाए तो पूरी दुनिया में आजकल दो तरीके का इस्लाम मौजूद है..एक जो पैगम्बर साहब लेकर आये और दूसरा जो चंद आतंकी संगठनों ने इजाद किया।इनके द्वारा इजाद किये गए इस्लाम के मायने ही दूसरे हैं..इनका मज़हब.. खून से दिये जलाना है।इनकी इबादत.. लोगों का घर उजाड़ना है।अगर आतंकवादी मज़हब की बात करते हैं तो ये सिर्फ उनका एक ढोंग मात्र है।आतंकवाद की कोई परिभाषा नहीं ये तो इंसानियत के कातिलों की रखैल है..वह जिस तरह चाहतें हैं इसका इस्तेमाल किया करते हैं।-

1 comment:
..SERIOUSLY SIR...ITS VERY ORIGINAL
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