Friday, February 12, 2010

एक अजीब सा सन्नाटा है

एक अजीब सा सन्नाटा है..
जाने सब थम सा गया है..
एक शोर चुप-चाप बैठा है..
जरूर कहीं एक घर उजड़ा होगा..
किसी तुफान ने अपना हशर छोड़ा होगा..

कि कहीं एक अजीब सा सन्नाटा है

आवाज़ें अब कोई नहीं करता..
हर जिस्म में वो इंसान सो गया है..
कभी कभी परिंदों की चैहकन..
सन्नाटे के शीशे तोड़ जाती है..
कभी कभी .....
हवा के पैरों की आहट..
हलचल सी पैदा कर जाती है..

कि कहीं एक अजीब सा सन्नाटा है

रात खंडहर सी टूटी पड़ी है..
दरीचों के जालों से चांद घिरा सा लगता है..
कई निशान वक्त के बिखरे पड़े हैं...
जाने कोई उनमें बीता सा लगता है..

चारों तरफ एक अजीब सा सन्नाटा है

Friday, February 5, 2010

सिफारिश

कोई होता तो ये बताता..कि मैं तुझे चाहता हूं कितना।
कोई तुझ तक मेरा ये पैग़ाम पहुंचाता..
कोई तुझे ये बताता.कि मैं मरता हूं तुमपर..
कि अटकी हैं सांसें उन्हें रफ्तार दे जा..
कि कभी लेकर मेरा नाम..मुझे वो प्यार दे जा।

कोई होता तो ये बताता..कि मैं तुझे चाहता हूं कितना।

मांगा है जो मेरा है...
इश्क का ईनाम दे जा..
कि आ जा निकलती नहीं जां अब तो..
छूकर मुझे जीने का अरमान दे जा।

कोई होता तो ये बताता..कि मैं तुझे चाहता हूं कितना।

की सिफारिश उन हवाओं से जो छूती हैं तुझको.
कि मिलें जो तुझसे तो मेरा अहसास दे जा..
मैंने चांद से मिन्नतों में तेरा अक्स मांगा...
तू छत पे आकर मुझे दीदार दे जा...

कोई होता तो ये बताता..कि मैं तुझे चाहता हूं कितना।

शाम मेरे दर्द से उदास बैठी है..
रात सितारों की चादर लिए मेरे पास बैठी है...
कम से कम इतना तो कर..
कि कायेनात की चुप को..तू ज़ुबान दे जा..
बस आ जा..मुझे वो बिछड़ा हुआ प्यार दे जा।

Monday, February 1, 2010

फिर तू आया...

तेरी याद आने लगी है..
मुझे फिर तड़पाने लगी है..
ख़ामोशियों की ज़ुबां बनकर..
तू फिर गुनगुनाने लगी है

तेरी याद फिर आने लगी है

हवाओं से तेरा पता पूछता मैं..
कि ख़ुशबू तेरी फिर वो लाने लगीं हैं

तेरी याद फिर आने लगी है

सितारों की चादर लपेटे हुए तू..
चांद का टीका लगाने लगी है

तेरी याद फिर आने लगी है

फिर याद आया है माज़ी मेरा जो..
आंखों से बारिश फिर आने लगी है..

तेरी याद फिर आने लगी है

के आ जा मेरी जां..अभी जान बाकी...और बहुत है मुहब्बत
के दुनियां ताने सुनाने लगी है

मुझे तेरी याद फिर आने लगी है