कोई होता तो ये बताता..कि मैं तुझे चाहता हूं कितना।कोई तुझ तक मेरा ये पैग़ाम पहुंचाता..
कोई तुझे ये बताता.कि मैं मरता हूं तुमपर..
कि अटकी हैं सांसें उन्हें रफ्तार दे जा..
कि कभी लेकर मेरा नाम..मुझे वो प्यार दे जा।
कोई होता तो ये बताता..कि मैं तुझे चाहता हूं कितना।
मांगा है जो मेरा है...
इश्क का ईनाम दे जा..
कि आ जा निकलती नहीं जां अब तो..
छूकर मुझे जीने का अरमान दे जा।
कोई होता तो ये बताता..कि मैं तुझे चाहता हूं कितना।
की सिफारिश उन हवाओं से जो छूती हैं तुझको.
कि मिलें जो तुझसे तो मेरा अहसास दे जा..
मैंने चांद से मिन्नतों में तेरा अक्स मांगा...
तू छत पे आकर मुझे दीदार दे जा...
कोई होता तो ये बताता..कि मैं तुझे चाहता हूं कितना।
शाम मेरे दर्द से उदास बैठी है..
रात सितारों की चादर लिए मेरे पास बैठी है...
कम से कम इतना तो कर..
कि कायेनात की चुप को..तू ज़ुबान दे जा..
बस आ जा..मुझे वो बिछड़ा हुआ प्यार दे जा।

1 comment:
बहुत खूब .. अच्छी रचना !!
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