ज़िन्दगी के पन्नों को पलटा तो पाया नाम तेरा..आई महक फिर तेरी..झूम उठा दिल मेरा..
याद आई बस वही शाम जिसमें हम मिले..
याद आया पल वही साथ जिसमें हम चले..
वक्त की रफ्तार को थाम लेना वो तेरा..
ज़िन्दगी के पन्नों को पलटा तो पाया नाम तेरा..
कदमों की आहट वो तेरी...
मुस्कुराहट वो तेरी..
पलके झुकाना वो तेरा..
बस कहते जाना वो तेरा..
याद आई बस मुझे वो बात मुलाकात की..
ज़िन्दगी के पन्नों को पलटा तो पाया नाम तेरा..
हुस्न तेरा क्या कहूं तू चांद पूनम की रात का..
होंठ तेरे बा-ख़ुदा भुला दें सब जो याद था..
आज बैठा मैं कहीं पीता रहा तेरे जाम बस..
जलवा मैं भूलूं कैसे अब तेरे हुस्न के सैलाब का..
ज़िन्दगी के पन्नों को पलटा तो पाया नाम तेरा..
भर ही जाती आंखें हैं जब भी हो आती याद तुम..
जल ही उठती थी वो दुनिया ऐसा मेरा यार था..
ज़िन्दगी के पन्नों को पलटा तो पाया नाम तेरा

2 comments:
waah sirji pyaar ki baarish ho rahi hai...
कई रंगों को समेटे एक खूबसूरत भाव दर्शाती बढ़िया कविता...बधाई
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