Saturday, May 29, 2010

मेरा शरारती चांद

मेरा चांद बहुत शरारती है..
उसकी एक नज़र दिल चुराती है..
हंसी मोतियों सी बिखरती है..
जैसे माला टूट गिर पड़ती है..
लमहें बच्चों सा ज़िद करते हैं..
जब मुझसे रूठ वो चल देती है..

मेरा चांद बहुत शरारती है..

ज़ुबां का काम आंखों से लेती है..
कुछ ना कह कर भी सब कुछ कह देती है..
खुश है तो खुश है वो..
पर ज़रा सी बात पे वो रो देती है..

मेरा चांद बहुत शरारती है...


बहानों से मेरे इर्द-गिर्द मंडराती है..
पर मेरे पास जाने से बहाने बनाती है..
चाहती है मुझको भूलकर सबकुछ..
पूछो तो बाते बनाती है..

मेरा चांद बहुत शरारती है...

गुस्सा कहूं क्या..है इतना कि तौबा..
गैरों को आंखें दिखाती है..
और ज़रा कोई मेरे करीब आ के देखे..
तो शोलों सा खुदको जलाती है वो..

मेरा चांद बहुत शरारती है...


बलाकि हसीं है...
बलाकि अदाएं..
के हर सांस पर याद आती है वो...

मेरा चांद बहुत शरारती है...