Friday, January 1, 2010

न्यू ईयर

एक गया तो फिर एक आया है,
नया साल कितने आगाज़ लाया है,
पिछले ने रुलाया ये कहा हमने,
नया हसाएगा ये उम्मीद लाया है
एक गया तो फिर एक आया है।

कई बातों के बीच गुज़रा जो कल
आज तो सुरज भी निकल इतराया है।
मेरे हाथों से जो छूट के गिर पड़े थे पल,
बटोर के हथेलियों में फिर से सजाया है,
एक गया तो फिर एक आया है।

चांद की अब चांदनी भी छनकर आने लगी
तुने जो शरमा के अपने चेहरे को छुपाया है
एक गया तो फिर एक आया है।


2 comments:

महेन्द्र मिश्र said...

नववर्ष की आपको और आपके परिवारजनों और मित्रो को हार्दिक शुभकामना .

अजय कुमार said...

खूबसूरत रचना , नव वर्ष मंगलमय हो