तेरी याद आने लगी है..मुझे फिर तड़पाने लगी है..
ख़ामोशियों की ज़ुबां बनकर..
तू फिर गुनगुनाने लगी है
तेरी याद फिर आने लगी है
हवाओं से तेरा पता पूछता मैं..
कि ख़ुशबू तेरी फिर वो लाने लगीं हैं
तेरी याद फिर आने लगी है
सितारों की चादर लपेटे हुए तू..
चांद का टीका लगाने लगी है
तेरी याद फिर आने लगी है
फिर याद आया है माज़ी मेरा जो..
आंखों से बारिश फिर आने लगी है..
तेरी याद फिर आने लगी है
के आ जा मेरी जां..अभी जान बाकी...और बहुत है मुहब्बत
के दुनियां ताने सुनाने लगी है
मुझे तेरी याद फिर आने लगी है

1 comment:
वाह भाई.. बहुत खूब..
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