क्या होगा तेरे इंतज़ार में ?उनका ज़िक्र मेरी बातों में मिल जाएगा,
उनका नाम अनायास ही मेरे हाथों से लिख जाएगा,
हूंगा मशरूफ दुनिया की भीड़ में,
पर एक चेहरा उनका भी दिख जाएगा,
यही होगा तेरे इंतज़ार में।
कहते-कहते कभी रुक जाया करूंगा,
दुनिया जो पुछेगी तो बहलाया करूंगा,
अकसर बताकर आंसूओं को पानी,
हंसके उन्हें पी जाया करूंगा,
यही होगा तेरे इंतज़ार में।
सूरज जो डूबेगा तो दिल उदास होगा,
शाम जो होगी तो दर्द पास होगा,
दीवारों को तकेंगी आंखें मेरी,
बस रात भर ख़्यालों में तू साथ होगा,
यही होगा तेरे इंतज़ार में।
कभी तुझे भी तो मैं याद आता हूंगा,
ना चाहतें हुए भी तुझे तड़पाता हूंगा,
बहानों से लेती तो होगी नाम मेरा,
बस ज़िक्र ही सही,
कुछ वक्त तेरे साथ तो बिताता हूंगा।

2 comments:
बहुत बढिया रचना है।भाव दिल से निकले हुए लगते हैं...बहुत सुन्दर लिखा है
कहते-कहते कभी रुक जाया करूंगा,
दुनिया जो पुछेगी तो बहलाया करूंगा,
अकसर बताकर आंसूओं को पानी,
हंसके उन्हें पी जाया करूंगा,
बहुत सुन्दर रचना!!
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