
मैं कोई लेखक नहीं...मगर मैने ज़िदगी को जिन आखों से देखा है उन आंखों ने मुझे वो दिखाया जिसे मैंने अपने लफ्ज़ों में समेटने की कोशिश करी है।मेरी ये रचनाएं उन पलों में लिखी गईं हैं जब मैं एक संवेदनशील इंसान से ज़्यादा कुछ नहीं था।
तू आए तो सुकून आए दिल को,
आदत तेरी है वादे तोड़ने की,
तोड़ के दिलों को बस मुह मोड़ने की,
पर हम भी शीशे का जिगर रखतें हैं,
हो जांए चूर फिर भी चुभने का हुनर रखतें हैं,
कि अब तू आए तो सुकून आए दिल को।
तुझे देखने की हसरत पाले बैठा हूं,
अब तेरे दर पे नज़रें टिकाए बैठा हूं,
वक्त का गुलाम सही पर दूंगा मात इस कमज़र्फ को,
कि मौत के आने पर भी उससे दामन बचाए बैठा हूं,
तुझे देखने की हसरत पाले बैठा हूं।
खुद सवाल भी मैं ही हूं और जवाब भी मैं ही होता हूं,
तुझे खुदा सा पूजता हूं और लोबान भी मैं ही होता हूं,
लेता हूं नाम तेरा जब भी महफिल में,
क्या कहूं बदनाम भी मैं ही होता हूं।
उनकों याद रहे कि हम हैं,
जब वो नींद से जागें तो याद आएं उन्हें,
और वो जब छज्जे से झांकें को कहीं दिख जाएं उन्हें,
बस उन्हें याद रहे कि हम हैं।
वो जब अपनी ज़ुबान से मेरा नाम लेतें हैं,
मानों सूखी ज़मी पे बारिश सी होती है,
महक उठता है समा उससे,
और मेरी खुशी अंकुर का रूप लेती है।
तेरी झुकी नज़रें आज भी याद आतीं हैं,
वो जब भी तेरा आना और आकर शरमाना,
तेरा कांपती आवाज़ में मेरा नाम पुकारना,
फिर घबरा के मेरे पहलु में बैठ जाना,
वो बातों में प्यार वो उन आंखों में इकरार,
तेरी झुकी नज़रें आज भी याद आतीं हैं,
तेरे आते ही बदल जाता था समा सारा,
तेरे मुसकुराते ही रौशनी का वो नज़ारा,
तेरा वो आंचल को संभालना,तेरा वो दांतों में उन्गलियों को दबाना।
ना भूला हूं..ना भूल सकता हूं,
तेरा बस मुझे आंखों से छु जाना।
डर के दरवाज़ों को देखतीं उन आंखों में दिखता था डर,
कि तुझे है फिर वापस जाना,
कि तेरी झुकी नज़रें आज भी याद आतीं हैं।
आप मेरे होते तो क्या होता,
मेरा दिल झूम के गाता,
और हर झोंका तेरा ही पैगाम लाता,
मेरा सूरज तुझसे उठता,
और ये चांद तेरे तकिये पर सोता,
आप मेरे होते तो ये होता, आप मेरे होते तो ये होता।
वो जब भी मेरे पहलु में बैठतें हैं,
मुझे उनके नूर का अहसास होता है।
रौशन होता है शजर उनसे,
और उनका एक लफ्ज़ भी मानों अज़ान होता है।
मेरे लफ्ज़ों के दायरे बहुत सीमित हैं,
ये तेरी ख़बियों की उड़ान क्या पकड़ पाएंगे।
हम तो दूर से देखते हैं इस चांद को,
मेरे हाथ कहां इसे छु पाएंगे।
तुझमें एक अलग सी बात लगती है,
तेरी आंखों की चमक झील का चिराग लगती है।
तू दुनिया की सबसे हसीन तो नहीं,
फिर भी तेरी सुरत मुझे महताब लगती है।
तुझमें एक अलग सी बात लगती है।
खुदा कहता है कि वो बेरहम नहीं,
कोई फिर बता दे कि वक्त के ज़ुल्म क्या हैं।
रात तंग करने लगी है मुझको,
नींदें भी नज़रें चुरातीं हैं,
जबकि दिवारें दिलातीं हैं एहसास तनहाई का,
और बस तुम ही तुम याद आते हो।
की तू क्या जाने कि तू क्या है,
चांद को दे दी है मात तूने,
सितारे तुझे लोरियां सुनाते हैं,
आसमां बन जाता है पलंग तेरा,
और तेरी पलकें उठते ही,
सारे परींदे जाग जातें हैं,
की तू क्या जाने कि तू क्या है।
आज भी तेरा जाना मुझे याद सा है,
समा बदला नहीं मगर रौशनी का आकाल सा है,
तुमहारे साथ ही गई मुस्कुराहट अपनी,
बस चेहरा हसता है मगर,
दिल कहीं उदास सा है,
आज भी तेरा जाना मुझे याद सा है।
आज भी तेरे नाम की हिफाज़त किया करता हूं,
आज भी तेरी यादों को हरपल जिया करता हूं,
रखा है संभाल कर तेरे वजूद के इस दिल ने,
तड़पता है ये और मैं तुझे याद किया करता हूं,
आज भी तेरे नाम की हिफाज़त किया करता हूं।
जो कहते थे कि नहीं गुज़रता एक पल भी तेरे बिन,
देखो उन्होने आधी ज़िन्दागी मेरे बगैर ही गुज़ार दी,
दूर जाने पर भीगो देते थे जो आंचल अपना,
आज उन्होने मेरी शख्सियत ही मिटा दी।
आसमां को नींद आए तो उसे सुलाएं कहां,
ज़मी को मौत आए तो उसे दफनाएं कहां,
सागर में लहरें उठे तो उसे छुपाएं तो छुपाएं कहां,
और मुझे तेरी याद आए तो हम जायें तो जायें कहां।

4 comments:
bahut hi badhiya.....sundar abhiwykti
bhai mere kisne itna dard de diya ki lafzon me wajan badhta hi ja raha hai...dil ke dard aankhon ke aanshu ki jagah shabdon ke moti hote ja rahe hain....itni shayrana baatein to kabhi na kiya karte the phir kis hansi khwab ne dil ke darwaje band kar diye...kiski itni siddat se yaad a rahi aaj kal...hamein bhi batao....waise jisne bhi ye dard diya hai ..kya khub diya hai....aapki rachnayen dekhkar sirf ek hi gaana yaad aa raha hai..."Main shayar to nahi ...magar ai hasi ..jab se dekha maine tujhko..mujhko...shayari aa gayi.."
ज़नाब मोहब्बत में फना होकर ग़ुरूर चूर हो जाता है,
महबूब में डूब कर खुद से बहुत दूर हो जाता है।
राम बचाए।
भई वाह.. मज़ा आ गया
गुटखौसी इलाहाबादी की इस नज़्म का..कोई जवाब नहीं...लगता है टूटे दिल के तार को इस कविता के ज़रिए जोड़ने की कोशिश की गई है...ये कोशिश क़ामयाब दिखती है
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