
आज बहुत रोने का दिल किया,
कोई वजह नहीं थी,तो रो नहीं सका।
आंसू भी अजीब होतें हैं,
आंखों की सरहद को लांगा नहीं करते।
पर थोड़ा रो लेता तो दिल हल्का हो जाता।
ग़मों के सागर से एक चुल्लू निकल जाता,
बे-वजह उदासी को एक वजह मिल जाती,
और मेरी ज़िन्दगी फिर ढर्रे पे आती।
बस थोड़ा रो लेता तो दिल हल्का हो जाता।
वैसे ग़मों की कमी नहीं मुझे,पर आंसूओं का आकाल सा पड़ा है,
पूरा आसमान है सर पर मगर रोने की जगह नहीं मिलती,
बस इतने ग़म हैं कि किसपर रोंऊ,ये गुत्थी है जो नहीं सुलझती।
बस थोड़ा रो लेता तो दिल हल्का हो जाता।
अब अपने ग़मों को लफ्ज़ों में पिरोने लगा हूं,
सोचता हूं ग़मों को शक्ल मिल सकेगी,
जब पलटूंगा इन्हे किताबों में,तब शायद रोने की वजह मिलेगी।
बस थोड़ा रो लेता तो दिल हल्का हो जाता।

4 comments:
bahut hi saarthak wajah aapane khoj nikali hai .....pics dekhar rone ko aa raha hai ......kuchh to hai is pics me .......
kash aapko rona hee na pade. rone ke liye to zindagi padi hai.
rachana sunder hai.
जब पलटूंगा इन्हे किताबों में,तब शायद रोने की वजह मिलेगी।
बस थोड़ा रो लेता तो दिल हल्का हो जाता।
इसलिए कहती हूँ...
तुम थोड़ा सा रो लो, खुद को हल्का कर लो...
तूफ़ानों के पहले की शांति को कुछ रो कर हल्का कर लो...
क्योंकि जबा बँधा पानी, बाँध को तोड़ बहता है...
सब तहस नहस कर देता है, खुद को भी न बचा पता है...
ना दूजे को संभाल पता है....इसलिए कहती हूँ...
वजह को छोड़ , बेवजह ही सही....
तुम थोड़ा सा रो लो, खुद को हल्का कर लो...
देखो आसपास सड़क पर आ..रोने की वजह मिल ही जायेगी. मन हल्का होगा कि नहीं, कह नहीं सकता.
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