Friday, August 14, 2009

तेरी अमानत..

तुम तो चले जाते हो,
पर अपने पीछे छोड़ जाते हो कुछ कीमती सामान,
अपनी खुशबू जो दिनों तक मेरे कमरे में रह जाती है,
वो सिलवटें जिनमें तेरी करवटें नज़र आतीं हैं,
वो तेरा नूर शजर पे रौशन सा रहता है,
और हर तरफ,
तेरी हंसी की आवाज़ें मंडरातीं है,
तुम तो चले जाते हो...।

मुझे तेरी ज़ुल्फों के निशान लिहाफों में मिल जातें हैं,
चुनकर उनकों हिफाज़त से संजो लेता हूं,
और करके याद गुज़रे लम्हों को,
फिर से उन्ही लम्हों को जी लेता हूं,
तुम तो चले जाते हो...।

कभी एक आंसू गिरा था तेरा,
मैनें अमानत सा रखा है,
उससे कीमती कुछ मेरा कहां है,
जो कभी आओगे वापस तो सब वैसा ही पाओगे,
तेरी हर चीज़ की हिफाज़त मैं करता हूं बरसों से,
बस तुझे लौटा के मैं सब कुछ,
दुनिया से विदा लूंगा।

2 comments:

Anonymous said...

Yeah..Love made you writer...Good..
But never talk about Dying...
You are a young boy, live life though it's tough. You will see so many other colors of your love...

ओम आर्य said...

uanke jane ke baad ka ehasas bahut hi sundar .......atisundar