Sunday, August 30, 2009

इज़हार..

जाने क्या अब होने को है,
दिल उदास है तो रोने को है,
उसकी एक झलक की ख़तिर
सारी दुनिया खंगोलने को है..
जाने क्या अब होने को है।

रोज़ की आदतों में शुमार है वो भी,
करता है प्यार पर छुपाता है वो भी,
हमेशा करके बाते इधर-उधर की,
बातों में अपनी उलझाता है वो भी।
जाने क्या अब होने को है।

अकसर लोग प्यार किया करतें हैं,
छुपातें है उन्ही से जिनसे बे-शुमार किया करतें हैं,
लूंगा सबक अब दुनिया से मैं भी,
और कह दूंगा की हां मुझे प्यार है तुमसे।

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