Tuesday, June 16, 2009

अब बस तू आये...




अब बस तू आये...तो ये दिल झूम के गाए।
तुमको दिल की बात कही,
अपना हाल-ए-बयां कर दिया।
तुम नज़रों को समझ ना सके
और हमने तुम्हें खुदा कह दिया।
तेरे आने की उम्मीद पर बैठा हूं
की तुम आओ तो मेरी सुबह हो,
ये दिल तेरे आने से जागे और
ये सांसें तेरी घबराहट को भांपे।
पर तुम बैठे हो दूर कहीं,
मेरी यादों से बेफिक्र, जहां ना तो तुम्हे
याद हूं मैं..और ना तो कोई फरियाद हूं मैं।
बस यही सोंचता हूं रह-रह के...
कि कहीं
तुने मुझे भुला ना दिया, जिसको चाहा था कभी टूट कर,
कहीं उसने मुझे मिटा ना दिया।
अब तो यही सोचता हूं मैं,
कि जब भी बारिश आये..
तेरी गीली सी मुस्कुराहट लाए
बैठा हूं तेरी आहट पर
कि बस अब तू आये, कि बस अब तू आये




4 comments:

think wat u thaught said...

realy a nice creation......

Vinay said...

बहुत सुन्दर रचना है

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!! बधाई.

RAJNISH PARIHAR said...

जी अगर प्यार सच्चा हो तो उसे आना ही होगा...!प्यार मे हर मौसम प्रियतम की याद दिलाता है,जाहिर है...