उलझन में हूं कि तुझे क्या कहूं ?तुझे बेमिसाल कहूं,
खुदा का कमाल कहूं,
या शायर का ख़्याल कहूं,
उलझन में हूं कि तुझे क्या कहूं ?
फूल कहूं,
कली कहूं,
या बाघबान का दुलार कहूं,
उलझन में हूं....
नज़्म कहूं,
ग़ज़ल कहूं,
या गीतों की बहार कहूं,
उलझन में हूं ....
मंदिर कहूं,
मसजिद कहूं,
या पीरों की मज़ार कहूं,
उलझन में हूं ....
इश्क कहूं,
मुहब्बत कहूं,
या दिल में पनपता प्यार कहूं,
उलझन में हूं ....
सुबाह कहूं,
शाम कहूं,
या रातों में निकलता चांद कहूं,
उलझन में हूं ....
दिल कहूं,
दिलदार कहूं,
या ख़त्म ना होता इंतज़ार कहूं,
उलझन में हूं ....
रिशता कहूं,
बंधन कहूं,
या जन्मों के तालूकात कहूं,
उलझन में हूं ....
करता हूं तुझसे प्यार कहूं,
इतना कि बे-शुमार कहूं,
कि अब मैं उलझन में हूं कि तुझको क्या कहूं।
कली कहूं,
या बाघबान का दुलार कहूं,
उलझन में हूं....
नज़्म कहूं,
ग़ज़ल कहूं,
या गीतों की बहार कहूं,
उलझन में हूं ....
मंदिर कहूं,
मसजिद कहूं,
या पीरों की मज़ार कहूं,
उलझन में हूं ....
इश्क कहूं,
मुहब्बत कहूं,
या दिल में पनपता प्यार कहूं,
उलझन में हूं ....
सुबाह कहूं,
शाम कहूं,
या रातों में निकलता चांद कहूं,
उलझन में हूं ....
दिल कहूं,
दिलदार कहूं,
या ख़त्म ना होता इंतज़ार कहूं,
उलझन में हूं ....
रिशता कहूं,
बंधन कहूं,
या जन्मों के तालूकात कहूं,
उलझन में हूं ....
करता हूं तुझसे प्यार कहूं,
इतना कि बे-शुमार कहूं,
कि अब मैं उलझन में हूं कि तुझको क्या कहूं।

3 comments:
कहते रहिये --- हो सके तो बिन कहे कुछ कहिये.
अच्छी रचना
Amma Yar sirf "aurt" kaho.
umaer ke sath uljhan khatm ho jay gi.
khareeeee achhchi kavita
बहुत उलझन है.
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