तेरी यादों की बारिश थमने का नाम नहीं लेती,सर से पांव तक सराबोर हूं तेरी याद में,
लफ्ज़ ख़त्म हैं जो उन्हें कह पाऊं किसी से,
अब तू ही कोई इलाज आकर बता दे।
जो तू आया तो नजरों को पानी मिलेगा,
मेरी यादों में तेरी तसवीर भी दिखेगी,
अपने ख्वाबों की ताबीर सामने देखूंगा,
जब तुम मुसकुरा के मेरा हाल पूछोगे।
सहेजी हुई बातों को कह पाऊंगा तुमसे,
सामने जो बैठोगी तो जी भर के देखूंगा,
बतलाऊंगा की आती हो कितना याद तुम,
और जब शरमाओगी तो हाथों से मूह छुपाओगी।
जब भी लिखता हूं तेरी याद लफ्ज़ों में,
तेरे जिस्म की परछाई को मेरे पास पाता हूं,
मेरी रूह डूब जाती है तेरी यादों के पानी में,
और नज़्म बनती है जैसे सीप में मोती।

4 comments:
मन की आवज, संवेदनशील कविता...बधाई और शुभकामनाएँ...
bahut pasand aayi
मेरी रूह डूब जाती है तेरी यादों के पानी में,
और नज़्म बनती है जैसे सीप में मोती।
बहुत खूब !!
बहुत सुन्दर!!!
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